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इस प्लांट के माध्यम से पाइपलाइन द्वारा गांव में 120 से अधिक घरों तक सुबह-शाम नियमित गैस आपूर्ति की जा रही है। खास बात यह है कि ग्रामीणों को मात्र ₹500 प्रतिमाह में यह सुविधा मिल रही है, जो एलपीजी सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ती है। किसान चन्द्रप्रकाश सिंह ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 3000 किलोग्राम गोबर का उपयोग कर बायोगैस और अन्य ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है, जो पहले बेकार चला जाता था। इस पहल से न केवल स्वच्छ ऊर्जा मिल रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस प्रकार की योजनाओं को नावार्ड एवं अन्य सरकारी योजनाओं से जोड़कर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि जनपद के अन्य गांवों में भी इस मॉडल को अपनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और किसानों को जैविक खाद भी प्राप्त होगी, जिससे मिट्टी की उर्वरता में सुधार होगा। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि जनपद की अन्य गौशालाओं में भी इसी प्रकार के बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार की जाए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ मिल सके। ग्राम एकौनी का यह मॉडल न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी पीडीडीयू नगर, जिला पूर्ति अधिकारी, तहसीलदार सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।WhatsApp us