शांति दूत न्यूज़.नई दिल्ली, 5 जून, राजधानी दिल्ली में मालवीय नगर अग्निकांड जैसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा उल्लंघनों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ व्यापक और कठोर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के साथ-साथ बिल्डरों, कॉलोनाइजरों तथा भवन मालिकों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी। बैठक में शहरी विकास एवं गृह मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष, एमसीडी आयुक्त, एनडीएमसी चेयरमैन, डिविजनल कमिश्नर, सभी जिला मजिस्ट्रेट और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राजधानी में एक फुल-प्रूफ निगरानी और कार्रवाई प्रणाली विकसित की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं पर स्थायी रोक लगाई जा सके। गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि अब आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत लापरवाह अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई होगी। दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो वर्ष की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई संभव होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत से अवैध निर्माण और सुरक्षा उल्लंघन पनपेंगे, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।सरकार ने यह भी तय किया है कि राजस्व वसूली अधिनियम-1890 के तहत सरकारी नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों के वेतन, पेंशन और संपत्तियों से की जाएगी। वहीं अवैध निर्माण में शामिल बिल्डर, कॉलोनाइजर और भवन मालिकों की चल-अचल संपत्तियां और बैंक खाते भी फ्रीज किए जा सकेंगे। प्रशासनिक बिखराव समाप्त करने के उद्देश्य से जिला मजिस्ट्रेटों की शक्तियों में व्यापक वृद्धि करने का निर्णय लिया गया है। अब डीएम अपने जिले में किसी भी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई, एफआईआर दर्ज कराने, अवकाश निरस्त करने तथा तत्काल कार्रवाई करने के लिए अधिकृत होंगे सरकार ने तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का भी फैसला किया है। ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल मैपिंग के जरिए हर तीन महीने में निर्माण गतिविधियों की समीक्षा होगी। किसी क्षेत्र में नया निर्माण शुरू होते ही संबंधित अधिकारियों को स्वतः सूचना भेजी जाएगी और कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। बैठक में जिला स्तरीय संयुक्त जांच समितियों के गठन का भी निर्णय लिया गया। इन समितियों में दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और नगर निगम के अधिकारी शामिल होंगे, जो होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण करेंगे। जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां तत्काल सीलिंग, एफआईआर और बिजली-पानी कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई की जाएगी।मुख्यमंत्री ने 17.5 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि नियमों के विरुद्ध निर्माण मिलने पर तत्काल निर्माण रोकने, प्राथमिकी दर्ज करने और भवन मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पुरानी ऊंची इमारतों की सुरक्षा समीक्षा कर आवश्यक होने पर ऊपरी मंजिलों को खाली कराने और सीलिंग की कार्रवाई भी की जाएगी। अग्नि सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने फिक्स्ड ग्लास विंडो को गंभीर खतरा बताते हुए सभी भवनों में खुलने योग्य खिड़कियां और बालकनियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बिना वैध कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाले भवनों को बिजली-पानी के नए कनेक्शन और अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी न करने का आदेश भी दिया गया।सरकार ने अवैध निर्माणों की शिकायतों के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल और विशेष ड्रोन सेल बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह सुधार का अंतिम अवसर है। यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।