111वें स्थापना दिवस पर भारतीयता के रंग में रंगा बीएचयू, झांकियों में दिखा विरासत से भविष्य तक का भारत

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“भारत: समग्रता के साथ निरंतरता” की थीम पर 31 झांकियों ने रचा सांस्कृतिक-वैचारिक उत्सव, बसंतोत्सव बना यादगार

शांति दूत न्यूज़.वाराणसी, महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अपने 111वें स्थापना दिवस पर भारतीयता के रंग में सराबोर नजर आया। वर्ष 1916 में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर स्थापित बीएचयू ने इस ऐतिहासिक दिन को ज्ञान, संस्कृति, परंपरा और नवाचार के विराट उत्सव के रूप में मनाया। समूचा परिसर उल्लास, उत्साह और गौरव की अनुभूति से आलोकित हो उठा। शुक्रवार को स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत प्रातः 7बजे विश्वविद्यालय के स्थापना स्थल पर हवन-पूजन के साथ हुई, जिसमें कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी सहित विश्वविद्यालय परिवार के वरिष्ठ अधिकारी, संकायाध्यक्ष, निदेशक, कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे। कुलपति ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।

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स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों, संस्थानों एवं केंद्रों द्वारा “भारत: समग्रता के साथ निरंतरता” की केंद्रीय थीम पर आधारित 31 भव्य झांकियां प्रस्तुत की गईं। प्रातः 10 बजे लक्ष्मण दास अतिथि गृह चौराहे से कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी एवं मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने झांकियों की शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रो.अमित पात्रा भी उपस्थित रहे।मालवीय भवन से गुजरती झांकियों की शोभायात्रा ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से लेकर आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों तक की यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। ऋषि-मुनियों से अंतरिक्ष यात्रियों तक, वैदिक गणित से ब्रह्मोस मिसाइल तक, पारंपरिक खेती से जैविक कृषि तक और स्वच्छ पर्यावरण व सतत विकास जैसे विषयों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यार्थियों की रचनात्मकता, उत्साह और प्रतिभा ने समारोह को जीवंत बना दिया।सेन्ट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना पर नृत्य के माध्यम से नारी शक्ति और शिक्षा का संदेश दिया, जबकि सेन्ट्रल हिन्दू बॉयज़ स्कूल ने लोकनृत्यों, गांधी दर्शन, स्वदेशी भावना, अंतरिक्ष विज्ञान और खेल उपलब्धियों को झांकी में साकार किया। रणवीर संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों ने वेदपाठ के साथ महिला शिक्षा की महत्ता को रेखांकित किया। महिला महाविद्यालय, कला संकाय, सामाजिक विज्ञान संकाय, शिक्षा संकाय, विज्ञान संस्थान, प्रबंधन अध्ययन संस्थान, वाणिज्य संकाय, कृषि विज्ञान संस्थान, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, आईआईटी (बीएचयू) सहित विभिन्न संकायों की झांकियों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक प्रगति और सांस्कृतिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। योग, आयुर्वेद, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, खेल, साहसिक गतिविधियां और सतत विकास जैसे विषयों ने झांकियों को विशेष अर्थ प्रदान किया। इस अवसर पर भारत कला भवन द्वारा पहली बार प्रस्तुत की गई झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें भारत की प्राचीन मूर्तिकला और चित्रकला की समृद्ध परंपरा को जीवंत रूप में दर्शाया गया। संगीत एवं मंच कला संकाय की प्रस्तुति ने जहां दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं दृश्य कला संकाय की झांकी में महामना की प्रतिमा ने सबका ध्यान खींचा। समग्र रूप से, बीएचयू का 111वां स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के सतत प्रवाह का सजीव प्रमाण बना। यह आयोजन विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत का उत्सव होने के साथ-साथ भविष्य की ओर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का प्रेरक संदेश भी देता है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्रावासों एवं छात्र नगर निकाय में सरस्वती पूजा का भी आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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