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कार्यक्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, एचपीवी टीकाकरण तथा किशोरावस्था में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथिया केंद्र (मॉडल-एएफएचसी), चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) एवं सर सुंदरलाल अस्पताल, बीएचयू द्वारा ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ कर्नल जी.पी. सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि युवा महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जागरूकता समय की आवश्यकता है और ऐसी पहलें छात्राओं को बेहतर स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाती हैं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आईएमएस-बीएचयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रो. डॉ. मेजर अंजलि रानी ने मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सेनेटरी पैड को नियमित अंतराल पर बदलना, स्वच्छता का ध्यान रखना तथा मासिक धर्म चक्र की निगरानी करना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। उन्होंने किशोरियों में बढ़ते एनीमिया के मामलों का जिक्र करते हुए आयरन युक्त भोजन और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी।डॉ. अंजलि रानी ने कहा कि बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण किशोरियों में पीसीओडी और पीएमओएस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर इन बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने एचपीवी टीकाकरण को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का प्रभावी उपाय बताते हुए किशोरावस्था में ही टीका लगवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान एडोलसेंट क्लिनिक की सेवाओं की भी जानकारी दी गई। परामर्शदाता हर्ष ने बताया कि आईएमएस-बीएचयू में किशोरों और युवा वर्ग के लिए विशेष परामर्श एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, जहां शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में कैडेट्स ने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और अपने सवालों के जवाब भी हासिल किए। कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।WhatsApp us