भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली दिव्य संहिता है- आचार्य विपुल कृष्ण
Ashutosh Tiwari
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वृन्दावन धाम से पथारे कथा वाचक आचार्य विपुल कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं, भक्तों की महिमा तथा धर्म की स्थापना का मार्मिक वर्णन किया। कथा के दौरान आचार्य श्री ने कहा कि “भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, यह जीवन जीने की कला सिखाने वाली दिव्य संहिता है।” उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत के बारहों स्कंध मानव जीवन के बारह अध्यायों के समान हैं, जो व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
कथा वाचक ने श्रीकृष्ण जन्म, ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद भक्ति, समुद्र मंथन तथा उद्धव-गीता जैसे प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का नाम ही कलियुग में मुक्ति का सबसे सरल उपाय है। उन्होंने कहा कि भक्ति आसक्ति रहित होनी चाहिए। कभी किसी का बुरा मत करो भजन हो जायेगा। सारा गड़बड़ मन करता है। इस लिए मन को अपने वश में रखो और वश में तभी होगा जब आप भगवान का सुमिरन करोगे जब ऐसा करोगे तब यही मन राम से मिला देता है। अपने बुजुर्गों की बात माननी चाहिए तथा सबको माता पिता दादा, दादी के साथ बैठना चाहिए ।
इससे भला हो जातेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि नारियों का सम्मान करना चाहिए सीख देते हुए उन्होंने बताया कि आप की जो भी आमदनी हो उसमें से आप यदि अपनी माता या पत्नी को कुछ देंगे तो तो आप की आय में कमी नहीं होगी बल्कि वृद्धि होती रहेगी। आगे उन्होंने कहा कि आज लोगों के चित्त में सद्बुद्धि नहीं बल्कि कुबुद्धि ने घेर रखा है। इस लिए लोग विषय विकारों में फंसकर अपने इस मूल्यवान जीवन को नष्ट करते हुए नरक गामी बनकर नाना प्रकार की योनियों में भटकता है। इस लिए यहां कथा सुन रहे सभी लोग नश्वर शरीर एवं संसार से आसक्ति को हटाकर सच्चिदानंद घन परमात्मा में मन को लगाकर बार बार संसार में आने के बंधन से मुक्त हो जाओ। कथास्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित होकर भक्ति संगीत, हरिनाम संकीर्तन और आरती में सहभागी बने। वहीं गांव के एक उभरते भजन गायक कलाकार ऊं जी उपाध्याय ने अपने भजन गाते हुए लोगों को झूमने थिरकने के लिए विवश कर दिया।WhatsApp us