“भगवन्नाम जप ही भवसागर से पार कराने वाली नाव है” — आचार्य विपुल कृष्ण
Ashutosh Tiwari
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कथा के प्रथम दिवस आचार्य श्री ने कहा कि कलियुग में मनुष्य धर्म से विमुख होकर विषय-विकारों में फँसकर अपने मूल्यवान जीवन को नष्ट कर रहा है। जबकि अनगिनत योनियों में भटकने के बाद ही मनुष्य शरीर प्राप्त होता है। गर्भ में रहते हुए जीव ईश्वर से मुक्ति की प्रार्थना करता है, परंतु जन्म लेते ही सब भूल जाता है और माया के बंधन में फँस जाता है।
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