
FOLLOW US:
साथ ही उन्होंने मोल्डिंग द्वारा कला कृतियाँ बनाना तथा वेस्ट मटेरियल से तोरण और बुकमार्क तैयार करना भी सिखाया। कार्यक्रम की संयोजक गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रितु खरवार ने बताया कि इस प्रकार के लघु अवधि कौशल विकास प्रशिक्षण विद्यार्थियों को स्वरोजगार एवं लघु उद्योग की दिशा में प्रेरित करते हैं। इससे छात्र-छात्राएँ आर्थिक रूप से सशक्त होकर देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। वहीं महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुकृति मिश्रा ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है। ऐसे कार्यक्रम छात्र छात्राओं को “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को साकार करने में सहायक सिद्ध होंगे।कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी बनाई हुई कला कृतियाँ साझा कीं। तथा सभी ने ऐसी उपयोगी कार्यशालाओं के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।WhatsApp us