शांति दूत न्यूज़. कोलकाता, पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 का विधानसभा चुनाव एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए राज्य की सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। ममता बनर्जी, जिन्होंने 2011 में 34 वर्षों पुराने वाम शासन को खत्म कर बंगाल की राजनीति में नया अध्याय लिखा था, इस बार अपनी राजनीतिक जमीन बचाने में सफल नहीं हो सकीं। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना करने वाली ममता बनर्जी ने आंदोलन की राजनीति के दम पर खुद को ‘गरीब और किसानों की नेता’ के रूप में स्थापित किया था। सिंगूर और नंदीग्राम जैसे आंदोलनों ने उन्हें जनसमर्थन दिलाया और 2011 व 2016 में पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली।हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव से तृणमूल की गिरावट के संकेत मिलने लगे थे। जहां पार्टी का वोट प्रतिशत स्थिर रहा, वहीं भाजपा का वोट शेयर तेजी से बढ़ा और मुकाबला सीधा हो गया। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल सत्ता तो बचाने में सफल रही, लेकिन भाजपा ने मजबूत विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। 2026 के चुनाव में यह बदलाव निर्णायक साबित हुआ। तृणमूल जहां करीब 90 सीटों पर सिमट गई, वहीं भाजपा 190 से अधिक सीटों के साथ आगे निकल गई। यह गिरावट केवल सीटों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राज्य के बदलते जनमत और राजनीतिक संतुलन का संकेत भी है। विश्लेषकों के अनुसार, तृणमूल की हार के पीछे कई कारण रहे। 15 वर्षों की सत्ता के बाद एंटी-इनकंबेंसी, संगठनात्मक कमजोरी, बड़े नेताओं का दलबदल, और विभिन्न घोटालों व विवादों ने पार्टी की छवि को प्रभावित किया। वहीं, भाजपा ने मजबूत संगठन, बढ़ते जनाधार और प्रभावी रणनीति के बल पर तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की। इसके अलावा, राज्य में क्षेत्रीय आधार का टूटना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। उत्तर बंगाल में भाजपा का प्रभाव बढ़ा, जबकि दक्षिण और शहरी क्षेत्रों में तृणमूल की पकड़ कमजोर हुई। युवाओं और मध्यम वर्ग का झुकाव भी भाजपा की ओर बढ़ा, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया। कुल मिलाकर, 2026 का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक युग परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जहां लंबे समय से स्थापित राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।