दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कुलपति प्रो अजित कुमार चतुर्वेदी
शांति दूत न्यूज़. (उ.प्र.)वाराणसी, 30 अप्रैल। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बी एच यू) के भारत अध्ययन केन्द्र के तत्वावधान में ‘भारत अध्ययन साहित्य संवाद’ श्रृंखला के अंतर्गत प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में साहित्य, लोक संस्कृति और परंपरा पर गहन विमर्श हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने की। उन्होंने कहा कि “पुस्तकों की विशेषता यह होती है कि पाठक उसे अपने दृष्टिकोण से समझता है, जबकि लेखक अपने अनुभवों के आधार पर उसे अभिव्यक्त करता है।” उन्होंने ‘चंदन किवाड़’ को आत्मकथात्मक स्वरूप से जुड़ी कृति बताते हुए कहा कि यह पुस्तक वर्तमान और भावी पीढ़ी के बीच सेतु का कार्य करेगी। विशिष्ट वक्ता
प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि यह पुस्तक “चाक्षुष यज्ञ और श्रुत यज्ञ” दोनों का संगम है। उन्होंने बताया कि मालिनी अवस्थी ने लोक संस्कृति, संगीत और अपने जीवन के अनुभवों को इस कृति में समाहित किया है, जिससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है।
वहीं लेखिका मालिनी अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक उन्होंने यात्राओं के दौरान लिखी है। उन्होंने लोकगीतों के पीछे छिपे मनोविज्ञान और समाजशास्त्र पर और अधिक शोध की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लोक गायन की जड़ें संस्कृत में निहित हैं, जिसने उन्हें भारतीय संस्कृति को समझने की व्यापक दृष्टि प्रदान की।
हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ द्विवेदी ने कहा कि यह पुस्तक लोक जीवन की संवेदनाओं को जीवंत करती है और स्त्री चेतना को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है।वहीं, प्राचीन इतिहास विभाग की प्रोफेसर प्रो. अर्चना वर्मा ने इसे “हृदय की गहराइयों से निकली भावनाओं की अभिव्यक्ति” बताया और ‘चंदन’ व ‘किवाड़’ के प्रतीकों के माध्यम से लोक में प्रवेश का सुंदर चित्रण बताया।






