लखनऊ के राष्ट्रीय सम्मेलन में 81 शोधपत्रों पर मंथन, सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए शोध आधारित नीति निर्माण पर जोर
शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) लखनऊ पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और शोध आधारित नीतियों की आवश्यकता पर बल देते हुए स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एसएमएस), लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘स्पीड्स-2026’ का सफल समापन हुआ। सम्मेलन में देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, जल संरक्षण तथा सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया और कई उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए।सम्मेलन के समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरणीय संकट अब केवल वैज्ञानिक विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है। ऐसे में अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता के समन्वय से ही प्रभावी समाधान संभव है। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सम्मेलन में सामने आए सुझावों को शासन और नीति-निर्माण संस्थाओं तक पहुंचाकर उन्हें व्यवहारिक योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।सम्मेलन के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सलाहकार डॉ. हरिकेश बहादुर सिंह ने युवाओं और शोधार्थियों से पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध करने का आह्वान किया। वहीं सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड एनवायरनमेंट के निदेशक (मानद) डॉ. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सतत कृषि, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और समाधानपरक अनुसंधान को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। एसएमएस लखनऊ के महानिदेशक (तकनीकी) भरत राज सिंह ने बताया कि सम्मेलन के लिए देशभर से 110 शोध-पत्र प्राप्त हुए थे, जिनमें विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद 81 शोध-पत्रों का चयन प्रस्तुतीकरण एवं प्रकाशन के लिए किया गया। इन शोधों से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा प्रबंधन, जल संसाधन संरक्षण और आपदा प्रबंधन से संबंधित नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. आशीष भटनागर ने कहा कि सम्मेलन ने विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया, जहां पर्यावरण और मानव अस्तित्व से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। वहीं संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव शरद सिंह ने कहा कि एसएमएस लखनऊ भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और शोध आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन आयोजित करता रहेगा। दो दिवसीय इस सम्मेलन में पर्यावरण, ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, जल सुरक्षा, पर्वतीय पारिस्थितिकी और आपदा विज्ञान जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इसे शोध, नवाचार और नीति निर्माण के बीच सेतु का कार्य करने वाला एक प्रभावी राष्ट्रीय मंच बताया। सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।