BHU में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’: CM योगी बोले- सोमनाथ भारत की अजेय आत्मा का प्रतीक, स्वामी अवधेशानंद-रामदेव समेत देशभर के संत-शिक्षाविदों ने दिया आध्यात्मिक संदेश*

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स्वतंत्रता भवन में संस्कृति मंत्रालय और यूपी सरकार का संयुक्त आयोजन, CM का वर्चुअल संबोधन; BHU कुलपति बोले- आत्मविश्वास और स्वाभिमान से ही राष्ट्र का विकास संभव

शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) वाराणसी, 12 मई, भगवान सोमनाथ के आधुनिक मंदिर के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मनाए जा रहे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026’ के अंतर्गत मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन में भव्य “आध्यात्मिक संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर के संत, आचार्य, कुलपति और शिक्षाविदों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर इस बात का प्रतीक है कि किसी राष्ट्र की आत्मा को कभी पराजित नहीं किया जा सकता। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारत का आध्यात्मिक संदेश विश्व मानवता के लिए अत्यंत उपयोगी है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि किसी भी समाज या राष्ट्र के विकास के लिए आत्मविश्वास और स्वाभिमान अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने त्रिकोणमिति, ज्योतिष, गणित और धर्मशास्त्र में भारत के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। उन्होंने इस आयोजन के लिए BHU के चयन को गौरव का विषय बताया।

संत समाज ने दिया सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश:*
*1. स्वामी अवधेशानंद गिरि*, आचार्यमहामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा ने कहा कि आज विश्वभर में आयुर्वेद, योग और भारतीय संस्कारों के प्रति उत्साह है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मनुष्य को आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाती है और विश्वविद्यालय ही नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। तथा योग ऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की धर्मशक्ति आध्यात्मिक चेतना और मानवीय उत्थान पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संत परंपरा और ऋषियों की तपस्या हमारी संस्कृति के मूल केंद्र हैं। तथा स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इसे “सनातन स्वाभिमान का पर्व” बताते हुए अहिल्याबाई होल्कर, सरदार पटेल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और महामना मालवीय के योगदान को याद किया। जबकि जगद्गुरु वासुदेवाचार्य ने युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रों में भी युवाओं को ज्ञान और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई है। वहीं  स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने “मंदिर केन्द्रित अर्थव्यवस्था” पर चर्चा करते हुए कहा कि करोड़ों लोगों की आजीविका मंदिरों और धार्मिक गतिविधियों पर आधारित है। मंदिर समाज, संस्कृति और रोजगार के भी महत्वपूर्ण आधार हैं।

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*कुलपतियों ने रखा भारतीय ज्ञान परंपरा का पक्ष:*
प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने गौरवशाली इतिहास के साथ नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने की बात कही। प्रो. ए.के. त्यागी ने “ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था” पर जोर दिया। प्रो. बिहारीलाल शर्मा ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों का पुनः उत्सव मनाया जा रहा है। प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने संस्कृत श्लोकों के माध्यम से सोमनाथ के पुनरुत्थान की भावना व्यक्त की।आयोजन के समन्वयक प्रो. ब्रजभूषण ओझा और सह-समन्वयक प्रो. विनय कुमार पाण्डेय रहे। कार्यक्रम में BHU के अनेक शिक्षकों, विद्यालयों और गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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