कथा की अमृतधारा थम गई: युवा भागवत प्रवक्ता अरविंद द्विवेदी पंचतत्व में विलीन, लोगों की नम आंखों से अंतिम विदाई

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शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) चंदौली,  धर्म, अध्यात्म और श्रीमद्भागवत की मधुर कथाओं से जनमानस को भक्ति का संदेश देने वाले चंदौली जनपद के जमोखर गांव निवासी युवा कथावाचक अरविंद द्विवेदी (44 वर्ष) गुरुवार को इस नश्वर संसार को अलविदा कहकर परमात्मा के श्रीचरणों में विलीन हो गए। उनके निधन की खबर से घर परिवार तथा पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं, शुभचिंतकों और ग्रामीणों ने इसे धर्म जगत की अपूरणीय क्षति बताया। अरविंद द्विवेदी बचपन से ही धर्म और अध्यात्म के प्रति गहरी आस्था रखते थे। युवावस्था में गृहस्थ जीवन अपनाने के बाद भी उन्होंने अपनी आध्यात्मिक साधना को कभी नहीं छोड़ा। आजीविका के लिए वह मुगलसराय के चंधासी स्थित इंडियन एयर गैसेस में कार्यरत थे, वहीं समय निकालकर श्रीमद्भागवत, रामचरितमानस एवं अन्य सनातन ग्रंथों की कथा सुनाकर लोगों में भक्ति, सदाचार और मानवीय मूल्यों का संदेश देते थे। उनकी सरल वाणी, मधुर शैली और आध्यात्मिक चिंतन से अनेक श्रद्धालु प्रभावित रहते थे। परिजनों के अनुसार पिछले कुछ समय से उनके दोनों गुर्दे खराब हो गए थे और उनका नियमित डायलिसिस चल रहा था। उपचार के दौरान वाराणसी के हेरिटेज अस्पताल में उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अरविंद द्विवेदी अपने पीछे पत्नी और एक पुत्र को छोड़ गए हैं। उनके असामयिक निधन की सूचना मिलते ही अस्पताल में शुभचिंतकों और परिचितों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गांव जमोखर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल छा गया। गुरुवार देर रात वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। क्षेत्र के लोगों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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