बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ‘नो बेड’ की पर्ची लेकर लौट रहे मरीज, व्यवस्था पर उठ रहे सवाल मरीजों में असंतोष

SHARE:

शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) वाराणसी। पूर्वांचल के सबसे बड़े और अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थानों में शामिल काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का ट्रॉमा सेंटर इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि गंभीर हालत में पहुंचने वाले कई मरीजों को “Regret, No Bed” लिखी पर्ची देकर वापस भेजा जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है तथा ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि सड़क दुर्घटना और अन्य गंभीर मामलों में उपचार की उम्मीद लेकर दूर-दराज के जिलों से बीएचयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचने वाले मरीजों को बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर भर्ती नहीं किया जा रहा। मजबूरी में उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। लोगों का सवाल है कि पूर्वांचल के इस प्रमुख ट्रॉमा सेंटर में यदि गंभीर मरीजों को ही भर्ती नहीं किया जाएगा, तो इसकी उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा होना स्वाभाविक है।इसी बीच ट्रॉमा सेंटर में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, संस्थान के भीतर प्रशासनिक असहमति और कार्यप्रणाली को लेकर मतभेद की स्थिति बनी हुई है। कुछ चिकित्सकों के बीच यह चर्चा है कि उन्हें कार्य करने में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं और नोटिसों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में बीएचयू प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान भी सामने नहीं आया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की कमी का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में आयोजित भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू के परिणाम अब तक घोषित नहीं होने से अभ्यर्थियों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों में असमंजस बना हुआ है। उनका कहना है कि परिणाम में विलंब से आवश्यक मानव संसाधन की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इस पूरे मामले पर बीएचयू प्रशासन और ट्रॉमा सेंटर प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वास्तव में बेड या स्टाफ की कमी है, तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करते हुए उसके समाधान के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। वहीं स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने, बेड क्षमता बढ़ाने तथा गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्वांचल के लाखों लोगों की स्वास्थ्य संबंधी उम्मीदें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर से जुड़ी हैं, इसलिए इसकी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाया जाना आवश्यक है।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई