वाराणसी में संत आशारामजी बापू के शिष्यों ने किया ‘ऋषि प्रसाद’ पत्रिका का वितरण, वैदिक ज्ञान के प्रसार का लिया संकल्प

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SHANTIDOOT NEWS, उतर प्रदेश वाराणसी। “साधकों की ये हरि ॐ बोली, ऐसी-वैसी ये बोली नहीं है; निंदकों की तड़प और गरज से हिलने वाली ये टोली नहीं है।” — इन शब्दों के साथ वाराणसी में संत श्री आशारामजी बापू के शिष्यों ने रविवार को उनकी मासिक पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ का वितरण अभियान चलाया। शिष्यों ने बताया कि ‘ऋषि प्रसाद’ पत्रिका में वैदिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान, पर्व-त्योहारों की महत्ता, एकादशी व्रत का महत्व, तथा स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक और यौगिक उपायों की जानकारी उपलब्ध होती है। इसके अतिरिक्त इसमें संतों के विचार, प्रेरक प्रसंग और जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले लेख भी प्रकाशित होते हैं। सेवादारों का कहना है कि यह पत्रिका विश्व की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली आध्यात्मिक पत्रिका मानी जाती है। संत आशारामजी ने अपने शिष्यों से इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने का आह्वान किया था, जिसके तहत साधक लगातार इसका वितरण कर रहे हैं।सेवादार बाबूलाल ने बताया कि “बापूजी को एक साज़िश के तहत फँसाया गया, लेकिन उन्होंने हमें जो तात्विक ज्ञान दिया है, वह अटल है। हम साधक उसी ज्ञान के आधार पर समाज में प्रेम, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश फैला रहे हैं।”उन्होंने कहा कि “बापूजी शरीर से भले ही जेल में हों, किंतु तत्व रूप से सर्वत्र व्याप्त हैं और अपने साधकों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।”

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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