
FOLLOW US:

इस मरीज की बाईं ओर पसलियों के बीच लगभग 8 सेंटीमीटर का चीरा लगाकर बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की गई। शल्यक्रिया के बाद मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और उसे ऑपरेशन के पांचवें दिन ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सर्जरी के बाद हुए तीन-चार फॉलोअप में भी मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और वह अब सामान्य जीवन जी रहा है। डाक्टर अरविंद पाण्डेय ने बताया कि MICS तकनीक में पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की अपेक्षा बड़ा चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं होती। इससे घाव का निशान अपेक्षाकृत छोटा रहता है और मरीज को दर्द तथा रिकवरी के लिहाज से भी लाभ मिल सकता है। सामान्य परिस्थितियों में मरीज 7 से 10 दिनों के भीतर अपनी सामान्य जीवनशैली में लौट सकता है। यह सुविधा अब तक मुख्य रूप से बड़े महानगरों में उपलब्ध थी, लेकिन सर सुंदरलाल चिकित्सालय में इसकी शुरुआत से पूर्वांचल के मरीजों को भी यह सुविधा मिल सकेगी।
सर सुंदरलाल चिकित्सालय के CTVS विभाग में बाईपास सर्जरी, वाल्व प्रत्यारोपण, जन्मजात हृदय रोगों जैसे ASD, VSD और TOF, री-डू ओपन हार्ट सर्जरी, रक्त वाहिकाओं तथा महाधमनी की सर्जरी नियमित रूप से की जाती है। इसके अलावा हृदय के वाल्व और जन्मजात हृदय रोगों से संबंधित कई शल्यक्रियाएं MICS तकनीक से भी की जा रही हैं। यह सर्जरी डॉ. अरविंद पांडेय के नेतृत्व में हुई। CTVS सर्जन टीम में डॉ. नरेंद्र नाथ दास एवं डॉ. किनीशों शामिल रहे। एनेस्थिसियोलॉजी टीम में डॉ. संजीव, डॉ. सोनल एवं डॉ. सोरिंग ने सहयोग किया। परफ्यूजनिस्ट के रूप में दिनेश मैती, सौम्यजीत एवं आशुतोष ने योगदान दिया। ऑपरेशन थियेटर नर्सिंग ऑफिसर्स में त्रिवेंद्र त्यागी, आनंद कुमार, राहुल, मुकेश, संजय, सत्येंद्र एवं सुतापा पॉल शामिल रहे। ओटी तकनीकी सहायकों के रूप में बैजनाथ पाल एवं ओम प्रकाश पटेल तथा वार्डबॉय अरविंद ने सहयोग किया।
सफल शल्यक्रिया में CTVS विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया तथा एनेस्थिसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. ए. पी. सिंह के मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चिकित्सालय प्रशासन की ओर से संस्थान प्रमुख प्रो. एस. एन. शंखवार एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा ।WhatsApp us