बीo एचo यूo में हर्षोल्लास से मनाया गया 11वां आयुर्वेद दिवस

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भगवान धन्वंतरी की प्रतिमा के  पास दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो एस एन शंखवार

आयुर्वेद की वैज्ञानिक विरासत को समाज तक पहुंचाने पर जोर, प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मिले पुरस्कार

भगवान धन्वंतरी की प्रतिमा के  पास दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो एस एन शंखवार

 शांति दूत न्यूज़. (उ.प्र.) वाराणसी, 23 सितंबर। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बी एच यू)के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय की ओर से बुधवार को धन्वंतरी भवन में 11वां आयुर्वेद दिवस हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद के शिक्षकों, चिकित्सकों, शोधार्थियों, स्नातकोत्तर एवं बीएएमएस विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार ने आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा और वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में आयुर्वेद के व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।   कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी के द्रव्यगुण विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. अनुग्रह नारायण सिंह ने आयुर्वेद के मूल प्रयोजन तथा स्वास्थ्य संरक्षण और रोगोपचार में औषधीय द्रव्यों के महत्व पर विचार व्यक्त किए।  उन्होंने आयुर्वेद में वर्णित औषधीय द्रव्यों के वैज्ञानिक, चिकित्सकीय एवं व्यावहारिक महत्व को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि बिमारियां प्रज्ञापराध के कारण भी होती हैं इसे समझने और निदान उपचार की विधि हजारों साल पहले से आयुर्वेद में ही वर्णित है। वक्ताओं ने कहा कि आज दिन और रात दोनों बराबर यानि सम होता है।

जो कि सम, शाम्य को दर्शाता है, इसी लिए आज आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। तथा आयुर्वेद का ज्ञान ज्योतिष का ही एक भाग है। हमारे ऋषी महर्षियों ने आयुर्वेद स्वास्थ्य भविष्य की परिकल्पना के साथ तैयार किया है। वहीं, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने भगवान धन्वन्तरि, आचार्य सुश्रुत, जीवक एवं कांकायण जैसे प्राचीन विद्वानों की परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने आयुर्वेद में स्वास्थ्य की व्यापक अवधारणा तथा समाज में वैद्य की भूमिका और दायित्व पर भी विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुर्वेद संकाय के डीन प्रो. के.एन. मूर्ति ने की। उन्होंने आयुर्वेद दिवस के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आयोजन समिति, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन आयुर्वेद के सिद्धांतों को समाज तक पहुंचाने तथा युवा पीढ़ी को इसकी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के प्रारंभ में आयुर्वेद दिवस समिति के समन्वयक प्रो. चन्द्रशेखर पाण्डेय ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।   समिति के अध्यक्ष प्रो. अजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि जब जिसकी प्रकृति साम्य होती है, वह सौम्य होता है। पित्त,कफ, वात, उष्ण वीर्य आदि का विवरण आयुर्वेद में है। तथा आयुर्वेद को मुख्य धारा में लाना होगा। आयुर्वेद दिवस पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।

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उन्होंने बताया कि पखवाड़े के दौरान वृक्षारोपण, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, श्लोक वाचन एवं पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, जनजागरूकता रैली सहित विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों के विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही आगामी शैक्षणिक आयोजन ‘AYUCON-27’ के ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. प्रियदर्शिनी तिवारी ने किया। समारोह में आयुर्वेद संकाय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, बीएएमएस एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी, पीएचडी शोधार्थी तथा अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे। आयोजन के माध्यम से आयुर्वेद के मूल उद्देश्य—स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी के रोग का शमन—के संदेश को समाज तक पहुंचाने और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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