नेपाल में जलप्रलय के बाद चीन पर सूचना साझा न करने के सवाल, बीजिंग ने आरोप नकारे; सीमा-पार आपदा प्रबंधन मजबूत करने पर जोर

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शांति दूत न्यूज़. (नेपाल) काठमांडू । नेपाल और चीन की सीमा पर आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब के बाद दोनों देशों के बीच समय पर आपदा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नेपाल में यह चर्चा सामने आई कि यदि सीमा के दोनों ओर समय रहते मौसम, जल विज्ञान और भूगर्भीय जोखिम से जुड़ी सूचनाएं साझा की जातीं तो जान-माल के नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था। हालांकि, चीन ने सूचना साझा न करने के आरोपों को खारिज करते हुए भविष्य में दोनों देशों के बीच आपदा संबंधी समन्वय और मजबूत करने की बात कही है।

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नेपाल के नुवाकोट सहित सीमा से लगे इलाकों में 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ और मलबे के प्रवाह ने भारी तबाही मचाई। नदियों में अचानक आए उफान ने घरों, पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। राहत एवं बचाव दल दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मृतकों की संख्या 360 से अधिक हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाल में ही कम से कम 359 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सूचना साझा नहीं करने के आरोपों पर नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि रसुवा-ग्यिरोंग सीमा क्षेत्र में हुई अचानक बाढ़ से चीन बेहद दुखी है और वह नेपाल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगा। चीनी पक्ष के शुरुआती आकलन के अनुसार नेपाल की ओर आए भूकंपीय घटनाक्रम के बाद हिमस्खलन और मलबे का बहाव हुआ, जिससे सीमा के दोनों ओर लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग लापता हुए। चीन ने कहा कि भविष्य में मौसम, जल विज्ञान और भूगर्भीय जोखिमों से जुड़ी सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान किया जाएगा। विशेष रूप से सीमा पार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के मामले में दोनों देशों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। आपदा के शुरुआती घंटों में इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया था। बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के आकलन में संकेत मिला कि जिस भूकंपीय घटना को पहले 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के बड़े हिस्से के ढहने और उसके बाद हुए मलबे के प्रवाह से उत्पन्न हुई थी। ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के भारी मलबे ने नदी के प्रवाह को प्रभावित किया और इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने निचले इलाकों में भारी तबाही मचाई।बचाव कार्यों के बीच एक और खतरा बना हुआ है। सीमा क्षेत्र में मलबे के कारण नदी का प्रवाह बाधित होने से एक झील जैसी स्थिति बन गई है, जिससे आगे अचानक पानी निकलने पर दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसी कारण अधिकारियों ने निगरानी और चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।चीन ने कहा है कि इस आपदा से सबक लेते हुए नेपाल और चीन को सीमा-पार आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और मजबूत करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में दोनों देशों की सीमा पर रहने वाले लोगों की जान और संपत्ति की बेहतर सुरक्षा की जा सके। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों, अस्थिर पर्वतीय भूभाग और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सीमा साझा करने वाले देशों के बीच वास्तविक समय में मौसम और जल विज्ञान संबंधी चेतावनी साझा करने की व्यवस्था भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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