संत आशाराम बापू के आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सागर: गुरु कृपा, साधना और आत्मकल्याण का संदेश बना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा

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शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.)वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी के अनौरा स्थित संत श्री आशारामजी बापू के आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद पूरे परिसर में अनुशासन, श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। प्रवेश द्वार पर श्रद्धालु मत्था टेककर आश्रम में प्रवेश करते रहे, जबकि विशाल सत्संग पांडाल में हजारों साधक हाथों में गोमुखी के भीतर माला लेकर गुरुमंत्र का जप करते हुए तथा वीडियो माध्यम से प्रसारित सत्संग को एकाग्र भाव से सुनते दिखाई दिए। व्यासपीठ पर संत श्री आशारामजी बापू का चित्र विराजमान था। चरण पादुका को गंगा जल से स्नान कराकर चंदन का तिलक लगाने के बाद पुष्प मालाओं से सजाकर धूप-दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और सुगंधित हो उठा। भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए साधक

सत्संग के दौरान प्रसारित संदेश में संत श्री आशारामजी बापू ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उद्देश्य केवल सांसारिक आसक्ति में उलझना नहीं, बल्कि शाश्वत ब्रह्म की प्राप्ति कर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होना है। उन्होंने कहा कि जैसे माता-पिता अपनी संतान का अहित नहीं चाहते, उसी प्रकार सद्गुरु भी अपने शिष्यों को जीवन-मरण के चक्र में बंधा हुआ नहीं देखना चाहते।

उन्होंने अपने अनुयायियों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक कर्म करते हुए भगवान के प्रति प्रेम रखें तथा प्रत्येक कार्य को ईश्वर और गुरु की सेवा मानकर करें, जिससे कर्म ही पूजा का स्वरूप धारण कर ले। गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संदेश में कहा गया कि शिष्य की श्रद्धा और गुरु की कृपा के मिलन से ही मोक्ष का द्वार खुलता है। चल रहे सत्संग विडियो में देखा गया कि बापू अपने शिष्यों को प्रेरित कर रहे थे कि वे गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भौतिक दक्षिणा से अधिक आत्मिक दक्षिणा के रूप में कोई श्रेष्ठ संकल्प लें और उसे जीवन में उतारें। चतुर्मास के आरंभ का उल्लेख करते हुए श्रद्धालुओं से चार माह तक नाम-जप, प्राणायाम, एकादशी व्रत, स्वाध्याय, मौन तथा आत्मचिंतन जैसे आध्यात्मिक संकल्प लेने की बात कहे आगे उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, संयम और सतत साधना से व्यक्ति अपने भीतर छिपी दिव्य शक्तियों को जागृत कर सकता है तथा जीवन को नई दिशा दे सकता है।आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं ने संत श्री आशारामजी द्वारा लगाए गए वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए जप किया।

स्टाल पर सेवा देती लड़की

श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यता प्रचलित है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ वट वृक्ष की परिक्रमा एवं पूजन करने से जीवन की अनेक कठिनाइयों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। आयोजन के उपरांत विशाल भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर संत श्री आशारामजी बापू से संबंधित मासिक आध्यात्मिक पत्रिका “ऋषि प्रसाद” की जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई।

बता दें कि संत आशारामजी आश्रम द्वारा अनेक आध्यात्मिक तथा ज्ञान वर्धक पुस्तकें प्रकाशित होती हैं। जबकि ऋषि प्रसाद ऐसी मासिक पत्रिका है जिसके देश विदेश में करोड़ों पाठक हैं। वहीं उनके ऊपर लगे आरोपों के बारे में पूछने पर शिष्यों ने विरोध करते हुए एक साज़िश का हिस्सा बताया।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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