शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) चंदौली जिले के सदर विकासखंड की ग्राम सभा बिसौरी में शिव जी के मंदिर के पास आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सोमवार को कथा व्यास श्री विपुल शरण उपाध्याय ने श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए गोपियों के विरह, उद्धव संवाद एवं भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का मार्मिक वर्णन किया।
कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथावाचक ने गोपियों के विरह प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि व्रज की गोपियाँ भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में इस प्रकार तल्लीन थीं कि उन्हें प्रत्येक झोंके में श्याम के आने का आभास होता था। “हवा भी चलती थी तो लगता था कि भगवान आ रहे हैं।” उन्होंने उद्धव-गोपी संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि ज्ञान से अधिक श्रेष्ठ भक्ति मार्ग है। उद्धव ज्ञान का संदेश लेकर आए, परंतु गोपियों की निष्काम भक्ति के आगे ज्ञान भी नतमस्तक हो गया। कथा के दौरान कालिया नाग मर्दन, शरद ऋतु की रास लीला तथा गोपियों के वस्त्रहरण प्रसंग की व्याख्या करते हुए व्यास जी ने कहा कि “भगवान से मिलने में माया ही सबसे बड़ी बाधा है। वस्त्र माया का प्रतीक है। जब तक मनुष्य अहंकार और माया का त्याग नहीं करता, तब तक ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं।” उन्होंने बताया कि प्राणी जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि व्रजवासी गोवर्धन की तलहटी में एकत्र होकर भगवान को भोग लगाते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी करंगुली पर धारण किया। कथा में व्यास जी ने कहा कि व्रज में दो स्थान ऐसे हैं जहाँ भगवान के दर्शन विशेष रूप से होते हैं—गोवर्धन की तलहटी और यमुना जी का तट। उन्होंने कहा कि भगवान स्वयं अपनी माता को पहले स्मरण करते थे, इसलिए मनुष्य को भी किसी शुभ कार्य से पूर्व घर के बड़ों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। व्रज मंडल से बाहर भेजा जाना गोपियों के लिए सबसे बड़ा दंड था। वे कृष्ण के दर्शन की प्रतीक्षा में व्याकुल रहती थीं और उद्धव से विनती करती थीं “हम कन्हैया को ढूंढ रहे हैं, क्या हमें उनके पास ले चलोगे?” कथा के अंत में व्यास जी ने कहा कि माखन मिश्री भगवान को बहुत ही प्रिय है। इस लिए यह अर्पित करने से प्रभु प्रसन्न होते हैं और सभी कार्य सिद्ध होते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भक्ति, सेवा और संस्कारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। साथ ही गाय पालन करने तथा उसकी सेवा करने से अनंत पुण्य प्राप्त होने की भी बात कहे। साथ ही उन्होंने कहा कि संपत्ति होना बड़ी बात नहीं है। लेकिन हर इंसान के दिल में भक्ति होना बहुत ही बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि सुख में अनेकों साथी होते हैं। परंतु दुख या संकट आने पर बहुत कम साथ निभाते हैं। बल्कि देखते ही मुंह मोड़ लेते हैं। लेकिन जो भगवान को हृदय से भजता है। भगवान सदैव उसका साथ निभाते हुए संकटों से पार ले जाते हैं। इस लिए भगवान तथा श्री राधा जी का सुमिरन भजन करतें हुए सत्य मार्ग पर चलते रहना चाहिए। कथा के उपरांत श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर झूमते हुए आरती में सहभागिता की तथा प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के आयोजन में मुख्य रुप से राकेश उपाध्याय, सत्यम उपाध्याय, भानु उपाध्याय, शुभम तिवारी, यज्ञनारायण उपाध्याय, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, सुमित उपाध्याय,ऋषभ उपाध्याय, पियूष उपाध्याय, प्रशांत उपाध्याय, सूरज सिंह द्वारा किया गया। विशेष रूप से देखा गया कि गांव के सभी लोगों ने सहयोग करते हुए कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।