बीएचयू में ‘काशी काय संगमम 2026’ का शुभारंभ: वात व्याधि पर राष्ट्रीय मंथन, 18 राज्यों से जुटे 300 विशेषज्ञ

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कार्यक्रम में अपना वक्तव्य देते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी

शांति दूत न्यूज़. (उत्तर प्रदेश)  वाराणसी,12 फरवरी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) के काय चिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन ‘वात व्याधि’ एवं पूर्व छात्र सम्मेलन “काशी काय संगमम 2026” का भव्य शुभारंभ मंचकला संकाय स्थित पं. ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में देशभर से आए प्रख्यात शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं विशिष्ट पूर्व छात्रों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन का उद्देश्य काय चिकित्सा के क्षेत्र में नवीन आयामों पर विमर्श को प्रोत्साहित करना, पूर्व छात्रों और वर्तमान शिक्षकों-विद्यार्थियों के मध्य अकादमिक एवं संस्थागत सहयोग को सुदृढ़ करना तथा आयुर्वेद की परंपरागत ज्ञानधारा को समकालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समन्वित कर समाजोपयोगी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य उन्मुख चिकित्सा प्रणाली को आगे बढ़ाना है। मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व छात्र विश्वविद्यालय के “ब्रांड एंबेसडर” होते हैं और वे संस्थान के परिवार का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की श्रेष्ठ परंपराओं और उत्तम प्रथाओं को बनाए रखने पर बल देते हुए कहा कि बदलते समय में भी बीएचयू की पहचान और मूल्यों का संरक्षण आवश्यक है। कुलपति ने पूर्व छात्र सहभागिता को सुदृढ़ करने हेतु आचार्य प्रभारी (एलुमनाई अफेयर्स) की नियुक्ति और बेहतर संवाद व्यवस्था विकसित करने की दिशा में प्रयासों की जानकारी दी।

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विशिष्ट अतिथि एवं आईएमएस के निदेशक प्रो. सत्य नारायण संखवार ने आयुर्वेद को प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा बताते हुए कहा कि पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी से शैक्षणिक समुदाय और अधिक सशक्त होता है। उन्होंने संस्थान और शिक्षकों के प्रति निरंतर सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया। आयुर्वेद संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. प्रदीप कुमार गोस्वामी ने स्वतंत्रता पूर्व से लेकर वर्तमान तक आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा पद्धति के विकासक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने आयुर्वेद को एक गतिशील सामाजिक विज्ञान बताते हुए कहा कि इसे निवारक चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना समय की मांग है। साथ ही, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और उसके वैज्ञानिक परीक्षण के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम के संयोजक एवं काय चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र प्रसाद के संचालन में आयोजित पूर्व छात्र सम्मान समारोह में कुलपति प्रो. चतुर्वेदी एवं निदेशक प्रो. संखवार ने पूर्व छात्रों को सम्मानित किया। आयोजन अध्यक्ष प्रो. जे. एस. त्रिपाठी ने बताया कि सम्मेलन में देश के 18 राज्यों से लगभग 300 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र में सम्मेलन स्मारिका का विमोचन तथा डॉ. अजय कुमार पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। आयोजन अध्यक्ष प्रो. के. एन. मूर्ति ने स्वागत भाषण दिया तथा आयोजन सचिव प्रो. ओ. पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सत्र का संचालन डॉ. श्रीलता एवं डॉ. समृद्धि काले ने किया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में वात व्याधि से संबंधित विभिन्न शोधपत्रों, व्याख्यानों और विचार-विमर्श के माध्यम से आयुर्वेद के समकालीन स्वरूप और उसके वैज्ञानिक आधार पर व्यापक मंथन किया जाएगा।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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