शांति दूत न्यूज़.(उ.प्र.) काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा “सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता और जनसंचार के बदलते रुझान” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य समापन रविवार को हुआ।
समापन सत्र में मीडिया, तकनीक, एल्गोरिदम, नैतिकता और व्यावसायिक दबावों के जटिल अंतर्संबंधों पर देश-विदेश के विद्वानों ने गहन विमर्श किया।समापन समारोह के मुख्य अतिथि शिव गंगा जनपद, तमिलनाडु के प्रसिद्ध संत कोविलूर स्वामी जी ने कहा कि आज मीडिया पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। एआई सूचना तो देता है, लेकिन इसे शुद्ध पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आगाह किया कि गलत सूचनाओं से घिरा समाज भविष्य में “मीडिया युद्ध” का साक्षी बन सकता है। साथ ही भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को उन्होंने सकारात्मक और आवश्यक पहल बताया। देश के प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व कुलपति प्रो. के. वी. नागराज ने कहा कि मीडिया और सत्ता के बीच शक्ति-संबंध हमेशा से मौजूद रहा है। यदि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं हुआ, तो यह सामाजिक असंतुलन को जन्म दे सकती है। उन्होंने पोस्ट-ट्रुथ के दौर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज सार्वभौमिक सत्य का संकट खड़ा हो गया है। यूट्यूब पत्रकारिता के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक पर नियंत्रण के अभाव में समाज को स्वयं नैतिक सीमाएं तय करनी होंगी। नैतिकता के बिना पत्रकारिता समाज के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकती है।
मीडिया के बदलते व्यावसायिक स्वरूप पर प्रो. सुरभि दहिया का विश्लेषण
समापन समारोह की मुख्य वक्ता प्रो. सुरभि दहिया (मीडिया बिजनेस स्टडीज, आईआईएमसी) ने कहा कि वर्तमान दौर में पत्रकारिता और प्रबंधन के बीच तालमेल अपरिहार्य हो गया है। 1991 के बाद मीडिया एक व्यावसायिक इकाई के रूप में उभरा और उसके मुद्रीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। डिजिटल मीडिया ने टीवी के एकाधिकार को तोड़ते हुए असीमित अवसर पैदा किए हैं। अब दर्शक केवल सूचना उपभोक्ता नहीं, बल्कि विमर्श को दिशा देने वाले सक्रिय सहभागी बन चुके हैं।उन्होंने आधुनिक मीडिया को “कंटेंट एक्सपीरियंस इकोनॉमी” की संज्ञा देते हुए कहा कि आज उपभोक्ता अनुभव सबसे अहम हो गया है। क्षेत्रीय कहानियों को वैश्विक मंच मिलने से भारतीय भाषाओं और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। साथ ही उन्होंने चिंता जताई कि भारत की तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकोनॉमी एल्गोरिदम के नियंत्रण में जा रही है, जिससे मानव-केंद्रित सृजन की जगह मशीन-संचालित सृजन ले रहा है। विज्ञापन पर बढ़ती निर्भरता मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता के लिए चुनौती बनती जा रही है। कोविड काल में प्रिंट मीडिया को हुए भारी आर्थिक नुकसान का भी उन्होंने उल्लेख किया।
तकनीक, सत्ता और नैतिकता पर गंभीर चेतावनी
विशिष्ट अतिथि विश्वभूषण मिश्र, सीईओ श्री काशी विश्वनाथ धाम ने पत्रकारिता के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हनुमान जी भगवान राम के कार्यों को एक कुशल पत्रकार की तरह संपादित और संप्रेषित करते थे।





