शांति दूत न्यूज़.(नई दिल्ली) — भारत ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान प्राप्त कर लिया है।
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सरकारी आकलन और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर तेज़ वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसके चलते यह उपलब्धि संभव हो सकी है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में बढ़ता निवेश, सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार तथा सुधारोन्मुखी नीतियां भारत की आर्थिक मजबूती के प्रमुख कारण हैं। वर्तमान में केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी ही भारत से आगे हैं। सरकार का कहना है कि यदि यही विकास गति बनी रही, तो 2030 तक भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ते हुए विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर होगा। यह उपलब्धि न केवल भारत की आर्थिक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती साख और प्रभाव को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुकाम देश के लिए गर्व का विषय है, हालांकि प्रति व्यक्ति आय और समावेशी विकास पर निरंतर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। इसके बावजूद, भारत की यह आर्थिक छलांग उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित कर रही है।