चोर से भिड़ा किशोर, सिस्टम से हार गया समाज — सुरक्षा के दावे खोखले, मोनू की मौत ने पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया

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      घटनास्थल पर एकत्रित गांव के लोग

शांति दूत न्यूज़.उत्तर प्रदेश चंदौली जिले में सैयदराजा थाना क्षेत्र के दुधारी गांव में हुई घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की नाकामी का प्रमाण है, जो नागरिकों से सुरक्षा का भरोसा तो लेती है, लेकिन वक्त आने पर खुद गायब रहती है।

घटना की जानकारी देते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सदर अनंत चंद्रशेखर

चोरी कर भाग रहे चोर को पकड़ने की कोशिश में गोली खाकर मारे गए किशोर मोनू की मौत ने पुलिस की रात्रि गश्त, अपराध नियंत्रण और सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात मुन्ना राम के घर चोरी की वारदात हुई। चोर बक्शा लेकर फरार हो रहे थे। पुलिस नहीं, बल्कि घर का किशोर मोनू अपराधियों से भिड़ गया। गांव के बाहर सिवान में उसने एक चोर को पकड़ लिया। यह साहस था या मजबूरी—इसका जवाब सिस्टम को देना होगा। हाथापाई के दौरान चोर के साथी ने तमंचा निकालकर गोली चला दी। गोली लगने के बाद भी मोनू ने चोर को नहीं छोड़ा। यही वह पल था, जब कानून की जगह एक किशोर कानून बनकर खड़ा था। परिणाम वही हुआ, जो अक्सर ऐसे मामलों में होता है—घायल मोनू को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। एक घर उजड़ गया, एक मां-बाप का सहारा छिन गया और गांव में मातम पसर गया। दूसरी ओर, सवाल यह है कि अगर पुलिस की गश्त सक्रिय होती, तो चोर गांव तक पहुंचते ही क्यों? और जब वारदात हो रही थी, तब पुलिस कहां थी? घटना के बाद एक चोर को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। पुलिस ने बताया कि वह बिहार के भभुआ क्षेत्र का निवासी है और उससे पूछताछ की जा रही है। लेकिन गांव में चर्चा है कि कुछ और चोर भी पकड़े गए हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही। यह चुप्पी संदेह पैदा करती है और पुलिस की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। पुलिस अधीक्षक द्वारा रात में थानों का निरीक्षण कर “सक्रियता” दिखाने की तस्वीरें भले ही सुर्खियां बन जाएं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अपराधी बेखौफ हैं। हत्या, लूट, डकैती और छिनैती की घटनाएं लगातार हो रही हैं और आम नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए खुद मैदान में उतरने को मजबूर है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब चोर पकड़ना भी आम लोगों की जिम्मेदारी है? यदि हां, तो फिर पुलिस व्यवस्था का औचित्य क्या रह जाता है? मोनू की मौत सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। अभी विगत नवंबर माह में मुगलसराय के एक दवा व्यवसाई रोहिताश पाल की सरेआम हत्या हुई कुछ लोगों को गिरफ्तार दिखाया गया। लेकिन शूटर आज तक नहीं पकड़ा गया। अगर इस घटना से भी पुलिस व्यवस्था नहीं चेती, तो अगला मोनू कौन होगा—यह सवाल हर घर के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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