बीएचयू दीक्षांत 2025: कला संकाय में 2,428 विद्यार्थियों को उपाधियां, तीन पीढ़ियों के भावनात्मक रिश्ते को प्रो. बुद्ध रश्मि मणि ने किया स्मरण

SHARE:

शांति दूत न्यूज़.वाराणसी, 13 दिसंबर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के 105वें दीक्षांत समारोह के अंतर्गत शनिवार को मातृ संकाय—कला संकाय का उपाधि वितरण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 2,428 विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 1,234 स्नातक, 1,012 स्नातकोत्तर तथा 182 पीएचडी उपाधियां शामिल रहीं। समारोह में विद्यार्थियों को कुल 112 पदक भी प्रदान किए गए।स्वतंत्रता भवन में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय विरासत संस्थान (IIH), नोएडा के कुलपति एवं प्रख्यात पुरातत्त्वविद प्रो. बुद्ध रश्मि मणि रहे। उनके साथ कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल एवं विभिन्न विभागाध्यक्ष मंचासीन रहे। अतिथियों ने वर्ष 2025 की परीक्षा में सफल विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां प्रदान कीं। मुख्य अतिथि प्रो. बुद्ध रश्मि मणि ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से अपने तीन पीढ़ियों के ऐतिहासिक एवं भावनात्मक संबंधों को साझा किया।

इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के हिंदी समाचार पत्र जनसत्ता के कार्यकारी संपादक मुकेश भारद्वाज द्वारा लिखी गई पुस्तक “माया ही मोक्ष है” अवश्य पढ़ें

उन्होंने बताया कि उनके पितामह पं. चंद्रबली त्रिपाठी महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी के निजी सचिव रहे, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों का भी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने भारतीय परंपरा में समावर्तन संस्कार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उसी पावन परंपरा का आधुनिक रूप है।प्रो. मणि ने तैत्तिरीय उपनिषद् के मंत्रों— “सत्यम वद, धर्मं चर, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव” —का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से श्रेष्ठ आचरण, नैतिक मूल्यों और जीवन में सत्य व धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।समारोह के प्रारंभ में कला संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संकाय की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कला संकाय में वर्तमान में 22 विभाग एवं छह केंद्र संचालित हैं, जो विश्वविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण और नए जीवन चरण की शुरुआत का उत्सव है। धन्यवाद उद्बोधन में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि मुख्य अतिथि स्वयं कला संकाय के पूर्व छात्र रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को उनके जीवन से विशेष प्रेरणा मिलती है। उन्होंने शिक्षा को आजीवन चलने वाली प्रक्रिया बताते हुए विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययनशील रहने और समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान एवं वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ। मंच संचालन प्रो. आरती निर्मल (अंग्रेजी विभाग) एवं डॉ. सिद्धिदात्री (संस्कृत विभाग) ने किया। संगीत एवं मंच कला संकाय की छात्राओं ने कुलगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षक, विभागाध्यक्ष, छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और गरिमा से परिपूर्ण रहा।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई