बी एच यू में गिरते मानक पर सवाल: ग्रेस नंबर से पास कैंडिडेट सीनियर रेजिडेंट इंटरव्यू तक पहुंचा

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शांति दूत न्यूज़. उत्तर प्रदेश, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में शिक्षा और चयन प्रक्रिया के गिरते मानकों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हड्डी रोग विभाग में सीनियर रेजिडेंट के पद के लिए आयोजित इंटरव्यू में ऐसे कैंडिडेट को भी बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसने ग्रेस नंबर से परीक्षा पास की है। इस खुलासे ने विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया, मेरिट और अकादमिक साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, हड्डी रोग विभाग में सीनियर रेजिडेंट के पद के लिए चल रही प्रक्रिया में एक ऐसे अभ्यर्थी का नाम भी इंटरव्यू सूची में शामिल किया गया, जो मूल रूप से निर्धारित न्यूनतम अंक नहीं ला पाया था और ग्रेस नंबर के सहारे पास घोषित हुआ था। चिकित्सा शिक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील और तकनीकी क्षेत्र में ग्रेस मार्क्स से पास कैंडिडेट को सीनियर रेजिडेंट जैसे जिम्मेदार पद के लिए अवसर देना कई विशेषज्ञों को अखर रहा है। शिक्षाविदों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ढिलाई से न सिर्फ बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की साख प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य के चिकित्सकों की ट्रेनिंग, रोगियों की सुरक्षा और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। उनका मानना है कि सीनियर रेजिडेंट जैसे क्लीनिकल और अकादमिक रूप से जिम्मेदार पदों पर केवल वही उम्मीदवार पहुंचें, जिनकी मेरिट, दक्षता और अकादमिक रिकॉर्ड निर्विवाद हो।बीएचयू के जानकारों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना समय की मांग है। विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे पूरे प्रकरण की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में केवल योग्य व मेरिट आधारित उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू और नियुक्ति का अवसर मिले, ताकि संस्थान की विश्वसनीयता और चिकित्सा शिक्षा के मानक दोनों सुरक्षित रह सकें।

Ashutosh Tiwari
Author: Ashutosh Tiwari

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