शांति दूत न्यूज़. उत्तर प्रदेश वाराणसी, 28 नवम्बर 2025।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) की प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञों की टीम भारत मेंकार्डियोटोकोग्राफ (CTG) की फिज़ियोलॉजिकल व्याख्या के ज्ञान के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभा रही है। बीएचयू देश का पहला विश्वविद्यालय अस्पताल बन गया है, जिसने इस विषय पर एडवांस्ड फिज़ियोलॉजिकल CTG मास्टरक्लास आयोजित की है।

उद्देश्य प्रसव के दौरान मां और शिशु की सुरक्षा बढ़ाना, अनावश्यक ऑपरेशन कम करना और प्रसवकालीन जटिलताओं से बचाव करना है। मीडिया कॉन्फ्रेंस हॉल, सूचना एवं जनसम्पर्क कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता को चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. शंखवार, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग की प्रोफेसर एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. उमा पाण्डेय तथा प्रो. मेजर अंजलि रानी ने संबोधित किया।
गलत व्याख्या से बढ़ता है खतरा
प्रसूति विशेषज्ञों ने बताया कि कार्डियोटोकोग्राफ (CTG) का उपयोग प्रसव के दौरान गर्भाशय संकुचन के प्रति भ्रूण की हृदय गति में होने वाले परिवर्तनों को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इसका मकसद ऐसे भ्रूणों की समय रहते पहचान करना है जिन्हें ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क क्षति या प्रसवकालीन मृत्यु का खतरा हो सकता है।लेकिन CTG की गलत व्याख्या बेहद गंभीर परिणाम दे सकती है—
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प्रसवकालीन मस्तिष्क क्षति
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प्रसव के दौरान या जन्म के बाद नवजात की मृत्यु
दूसरी ओर सामान्य भ्रूणीय तनाव प्रतिक्रियाओं को गलत तरीके से खतरे का संकेत मान लेने पर अनावश्यक आपातकालीन सीजेरियन, फोर्सेप्स या वैक्यूम डिलीवरी कर दी जाती है, जिससे— -
प्रसवोत्तर रक्तस्राव
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संक्रमण (सीप्सिस)
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शिरापरक थ्रोम्बोएम्बोलिज़्म
जैसी जटिलताएँ बढ़ सकती हैं। अगली गर्भावस्थाओं में गर्भाशय फटने और प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम जैसी गंभीर समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मास्टरक्लास
BHU की प्रसूति टीम साक्ष्य-आधारित नैदानिक अभ्यास और व्यक्तिगत देखभाल के सिद्धांतों के साथ माताओं और शिशुओं की सुरक्षा बढ़ाने पर केंद्रित है। इस सिलसिले में बीएचयू, ग्लोबल एकेडमी ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग, लंदन के निदेशक के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिन्होंने 2006 में CTG की फिज़ियोलॉजिकल व्याख्या की अवधारणा की शुरुआत की थी।इसी कड़ी में एक दो दिवसीय इंटरैक्टिव एडवांस्ड फिज़ियोलॉजिकल CTG मास्टरक्लास आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं नवजात शिशु के परिणामों को बेहतर बनाना और प्रसवकालीन जोखिम कम करना है। प्रोफेसरों ने बताया कि BHU 2024 में 20 से अधिक देशों के 50+ CTG विशेषज्ञों द्वारा निर्मित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सहमति दिशानिर्देशों के सिद्धांतों को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि—
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अनावश्यक प्रतिकूल प्रसवकालीन परिणामों
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तथा आपातकालीन सीजेरियन सेक्शनों
की संख्या में कमी लाई जा सके।



